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पहले शून्य रन पर गिरे 3 विकेट, फिर 2 ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों ने अर्धशतक लगा दिला दी 20 साल पहले की याद

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ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के बीच जारी वनडे सीरीज के दूसरे मैच में कमाल हो गया। पहले तो तीन बल्लेबाज खाता खोले बिना आउट हो गए, इसके बाद मार्नस लाबुशेन और जेवियर बार्टलेट ने नंबर सात और आठ पर आकर अर्धशतक पूरा किया।
ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम भी कमाल कर रही है। कभी बिना कोई रन बनाए टॉप ऑर्डर के 3 बल्लेबाज आउट हो गए और इसके बाद लोअर मिडल ऑर्डर के बल्लेबाजों ने आकर शानदार अर्धशतक पूरा किया। इन दो बल्लेबाजों के अर्धशतक से जहां एक ओर टीम मजबूत हो गई, वहीं अब से करीब 20 साल पुरानी यादें भी ताजा हो गईं। ऑस्ट्रेलिया के लिए वनडे में सात और उससे नीचे खेलने वाले दो बल्लेबाजों ने लंबे समय बाद 50 से अधिक रन बनाने में कामयाबी हासिल की है।

ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के बीच खेली जा रही है तीन मैचों की वनडे सीरीज
इस वक्त ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के बीच वनडे सीरीज खेली जा रही है। इसके लिए ऑस्ट्रेलियाई टीम इस वक्त बांग्लादेश दौरे पर है। सीरीज के पहले मैच में ही बांग्लादेश ने ऑस्ट्रेलिया को पीट दिया और सीरीज में बढ़त बना ली। इसके बाद जब दूसरा मैच शुरू हुआ तो पारी का आगाज बहुत ही खराब हुआ। टीम के तीन बल्लेबाज आउट होकर पवेलियन जा चुके थे, लेकिन टीम का एक भी रन नहीं बना था।

मैथ्यू शॉर्ट, कूपन कनोली और मैट रेनशॉ का खाता भी नहीं खुला
मैथ्यू शॉर्ट, कूपन कनोली और मैट रेनशॉ ​बिना खाता खोले आउट हो गए। इसके बाद कई बल्लेबाजों ने टीम को मजबूती देने की कोशिश की, लेकिन वे भी नाकाम रहे। आखिर में मार्नस लाबुशेन और जेवियर बार्टलेट ने अर्धशतक पूरा किया। मार्नस नंबर 7 और जेवियर बार्टलेट नंबर आठ पर बल्लेबाजी के लिए आए। लाबुशेन ने 85 बॉल पर 55 रन की पारी खेली। इसमें तीन चौके शामिल रहे। वहीं जेवियर बार्टलेट ने 48 बॉल पर तेजी से 52 रन बनाए। इसमें चार चौके और दो छक्के उनके बल्ले से आए।

ऑस्ट्रेलिया ने दोहराया साल 2006 वाला कमाल
ऑस्ट्रेलिया के वनडे इतिहास में ऐसा केवल तीसरी बार हुआ है, जब टीम के सातवें और उससे नीचे आने वाले बल्लेबाजों ने 50 से अधिक रन बनाए हों। पहली बार साल 1994 में ऐसा हुआ था। तब शेन वार्न और पॉल राइफल ने काफी नीचे आकर अर्धशतक लगाया था। इसके बाद साल 2006 में माइक हसी और ब्रेट ली ने भी अर्धशतक पूरा करने में कामयाबी हासिल की थी। यानी करीब 20 साल बाद ऑस्ट्रेलिया के लिए ऐसा होते हुए नजर आ रहा है। दरअसल टीम के टॉप बल्लेबाज जल्दी आउट हो गए, इसलिए नीचे के बल्लेबाजों के पास मौका बना, जिसका उन्हें फायदा उठा लिया। लेकिन टीम फिर भी बड़ा स्कोर नहीं बना सकी। जिसके लिए ऑस्ट्रेलिया को जाना और पहचाना जाता है।

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