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प्रदोष व्रत किस-किस तरीके से रख सकते हैं?

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प्रदोष व्रत हर महीने की शुक्ल और कृष्ण दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। ये व्रत भगवान शिव को समर्पित है। कहते हैं जो भी भक्त सच्चे मन और नियम के साथ ये उपवास रखता है उसकी मनचाही कामना पूरी हो जाती है। लेकिन अब सवाल ये आता है कि इस व्रत को रखने के नियम क्या हैं यानी आप किस-किस तरीके से ये व्रत रख सकते हैं, यहां हम इसी बारे में आपको बताएंगे।
शास्त्रों अनुसार प्रदोष व्रत तीन तरीके से रखा जा सकता है – निर्जला, फलाहारी और एक समय भोजन करके। आप अपनी श्रद्धानुसार किसी भी तरीके से प्रदोष व्रत उठा सकते हैं। चलिए आगे जानते हैं इन तीनों तरीकों के बारे में विस्तार से आगे।
निर्जला प्रदोष व्रत: यह प्रदोष व्रत सबसे कठिन होता है क्योंकि इस दौरान न तो कुछ खाया जाता है न ही पिया जाता है। यानी ये व्रत निर्जला रखा जाता है। शाम में प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने के बाद ही भक्त अन्न और जल का सेवन करते हैं।
फलाहारी प्रदोष व्रत: कई श्रद्धालु फलाहारी प्रदोष व्रत ही रखते हैं। इसमें अन्न का सेवन न करके सिर्फ व्रत वाले भोजन का ही सेवन किया जाता है। इस तरीके के प्रदोष व्रत में कोई दिन में कभी भी फलाहारी भोजन का सेवन कर लेता है तो कोई-कोई सिर्फ शाम की पूजा के बाद ही व्रत वाला भोजन करता है।
एक समय भोजन वाला प्रदोष व्रत: इस तरीके के प्रदोष व्रत में भक्त दिन में फलाहारी भोजन करते हैं तो वहीं शाम की पूजा के बाद एक समय अन्न का सेवन कर लेते हैं।

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