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रेलवे परियोजना में मुआवजे का बड़ा खेल? पीडब्ल्यूडी ने 3161948 लाख आंका भवन, पीड़ित का दावा- मिलना था दोगुना, मिले सिर्फ 208400 लाख

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प्रयागराज। प्रयागराज में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन से प्रयागराज के बीच तीसरी रेलवे लाइन निर्माण परियोजना को लेकर मुआवजा वितरण पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पीड़ित कृष्ण कुमार ने आरोप लगाया है कि रेलवे परियोजना के लिए उनका मकान अधिग्रहित कर लिया गया, लेकिन मूल्यांकन और भुगतान में भारी अनियमितता बरती गई। उनका कहना है कि करीब डेढ़ वर्ष बीत जाने के बावजूद उन्हें आज तक न्याय नहीं मिला और संबंधित अधिकारी लगातार टालमटोल कर रहे हैं।

कृष्ण कुमार के अनुसार, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा किए गए भवन मूल्यांकन में उनके मकान की कीमत 15,80,974 रुपये निर्धारित की गई थी। उनका दावा है कि रेलवे अधिग्रहण के नियमों के अनुसार उन्हें इस राशि का दोगुना, यानी लगभग 31,61,948 रुपये मुआवजा मिलना चाहिए था। लेकिन नोटिस में केवल 23,15,559 रुपये की राशि दर्शाई गई, जिसे वह पूरी तरह गलत बताते हैं। इतना ही नहीं, उनका आरोप है कि वास्तविक भुगतान के नाम पर उन्हें केवल 2,08,400 रुपये ही दिए गए, जिससे उनका परिवार आर्थिक संकट में फंस गया है।

पीड़ित का कहना है कि उनका मकान प्रयागराज तहसील क्षेत्र के ग्राम सभा समहन, गाटा संख्या 144 में स्थित था, जो तीसरी रेलवे लाइन निर्माण परियोजना के दायरे में आ गया। पीडब्ल्यूडी के मूल्यांकन पत्र में स्पष्ट रूप से भवन की मालियत दर्ज होने के बावजूद उन्हें उचित मुआवजा नहीं दिया गया। उनका आरोप है कि गलत शपथपत्र और दस्तावेजों के आधार पर भुगतान प्रक्रिया को प्रभावित किया गया, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

कृष्ण कुमार का कहना है कि वह पिछले करीब डेढ़ साल से संबंधित मुआवजा कार्यालय के लगातार चक्कर काट रहे हैं। उनका आरोप है कि हर बार अधिकारी उन्हें “आज नहीं, कल आना”, “परसों आना” कहकर वापस लौटा देते हैं। उनका कहना है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है और न ही उन्हें यह बताया जा रहा है कि शेष मुआवजा कब मिलेगा।

पीड़ित ने शासन और जिला प्रशासन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, मुआवजे की गणना की पुनः समीक्षा करने तथा नियमानुसार पूरी राशि का भुगतान कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते न्याय नहीं मिला तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को मजबूर होंगे।

फिलहाल यह सभी आरोप पीड़ित कृष्ण कुमार द्वारा लगाए गए हैं। संबंधित रेलवे प्रशासन, भूमि अधिग्रहण विभाग अथवा जिला प्रशासन का पक्ष अभी सामने नहीं आया है। यदि संबंधित विभाग का जवाब प्राप्त होता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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